Saturday, October 17, 2009

मुझको जमाने भर से मुहब्बत मिले तो क्या


मुझको जमाने भर से मुहब्बत मिले तो क्या
तेरे बगैर गर मुझे जन्नत मिले तो क्या

मुह्ताज़े -नाखुदा तेरा बेहतर है डूबना
साहिल तुझे किसी की बदौलत मिले तो क्या।

मैंने जो शेर अपने वतन के लिए कहे
उनसे पराये मुल्क में शुहरत मिले तो क्या।

रखी हुई गले पे हो खंजर की तेज़ धार
सौ साल ऐसी जीने की मुहलत मिले तो क्या।

जरदार यूँ तो कोई भी हो सकता है मगर
गैरत को बेचकर अगर दौलत मिले तो
क्या।


Saturday, September 26, 2009

जिन्दगी दर्द नहीं सोज़ नहीं साज़ नहीं

जिंदगी दर्द नहीं सोज़ नहीं साज़ नहीं

एक अन्ज़में तमन्ना हैं ये आगाज़ नहीं

अहमियत अपने उसूलों की समझिये वरना

साँस लेना ही कोई जीने का अंदाज़ नहीं

Monday, April 13, 2009



मैं फासले अब निगाहों के सब मिटा दूँगा।
तुम्हारे दिल को बहुत पास से सदा दूँगा ।

मुझे यकीन है वो दिन है मेरी मुठ्ठी में ,
जब इस ज़माने को खुशबू भरी फिजा दूँगा।

खुदाया शौके-मुसाफत की लाज रख लेना ,
मैं मंजिलों को भी अब रास्ता बना दूँगा।

तुम मेरी वज्हे- तबाही तालाश कर लेना ,
मैं दोस्तों के तुम्हें नाम बस गिना दूँगा ।

तिरे सुलूक से महसूस हो रहा है मुझे ,

मैं तुझको दिल से बहुत जल्द ही भुला दूँगा।

मेरी तबाही के आलम को याद
कर लेना
शिकस्ता क़दमों को यूँ भी मैं हौसला दूँगा।



मेरी प्रकाशित पुस्तक


मेरी इस पुस्तक का विमोचन मेरे जन्म दिन १ - ४- २००९ को जबलपुर में हुआ। इसमें समय समय पर लिखे लेख सम्मिलित हैं। आशा करता हूँ कि आपका प्यार जरूर मिलेगा।

Sunday, March 8, 2009

मेरी संस्था की पत्रिका


अभिव्यक्ति मेरी प्रकाशित ग़ज़ल पुस्तक


Wednesday, March 4, 2009

शुभ सूचना

सभी कवि, कवियत्री व शायर ,शायरा, (जबलपुर )

आप सबसे अनुरोध है की मेरे यहाँ हर माह के अन्तिम रविवार को दोपहर ३ बजे काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। पुरानी एवं नई प्रतिभाओं को मंच दिया जाता है। जो भी इस संदेश को देखें, उन सभी का हमारे घर पर स्वागत है। बहुत से कवि भाइयो व कवियत्री बहिनों को पता होगा और जिनको पता नहीं है उन सबको बताना चाहता हूँ।
"वर्तिका" एक साहित्यिक संस्था है जिसको सांसद श्री राजेश सिंह जी का ,विधायक श्री ईश्वर दास रोहानी जी का एवं तत्कालीन जबलपुर जिलाधीश श्री संजय दुबे जी का आदि महान हस्तियों के शुभ संदेश ,शुभ आशीष प्राप्त हैं।
श्री एम.एल.बहोरिया"अनीश"जी वर्तिका के संरक्षक हैं। संपादक मैं स्वयं साज़ जबलपुरी , उपसंपादिका सुश्री मीनाक्षी कोरी । "वर्तिका" समाज में साहित्यिक,सांस्कृतिक प्रकाश फैलाने का कार्य वर्ष १९८४ से निरंतर कर रही है। इसी श्रंखला में लगभग १०८ कवि शायरों का समवेत काव्य संकलन"अभिव्यक्ति" २००८ में प्रकाशित किया गया है।

मेरे घर का पता :-

साज़ जबलपुरी
११३, सोनिया अपार्टमेन्ट
फेस I साउथ सिविल लाइंस , जबलपुर
मोबाइल : ९८२६३७४३५३